नई दिल्ली (New Delhi): भारत भर में 'सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट' (Solid Waste Management) नियमों के खराब और असमान पालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान पीढ़ी व्यवस्था में सुधार के लिए और इंतजार नहीं कर सकती। इसी के साथ कोर्ट ने पूरे देश के लिए कई सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने जा रहे नए SWM नियमों (SWM Rules, 2026) को लागू करने के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस पंकज मित्तल और एस वी एन भट्टी की पीठ ने 19 फरवरी को दिए अपने आदेश में साफ कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार जीवन के अधिकार का एक अटूट हिस्सा है।
- सोर्स पर सेग्रीगेशन में विफलता: कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि महानगरों में आज भी बड़े-बड़े कूड़े के पहाड़ (Dumpsites) सक्रिय हैं। शहरी और ग्रामीण इलाकों में गीले, सूखे और खतरनाक कचरे को स्रोत पर ही अलग (Segregation) करने का काम अभी भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है।
- "अब नहीं तो कभी नहीं": पीठ ने कहा कि बुनियादी ढांचा तैयार किए बिना और स्रोत पर कचरा अलग किए बिना शानदार नतीजों की उम्मीद करना बेमानी है। हर हितधारक का यह कर्तव्य है कि वह भारत को कचरा मुक्त बनाने में अपनी भूमिका निभाए।
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अधिकारियों और नेताओं की तय की गई जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए निर्देश जारी किए हैं:
- मेयर और पार्षदों की ड्यूटी: पार्षदों, मेयरों और वार्ड सदस्यों को सोर्स-सेग्रीगेशन की शिक्षा के लिए मुख्य सूत्रधार (Lead facilitators) बनाया गया है। उनका यह वैधानिक कर्तव्य है कि 2026 के नियमों को लागू करने में हर नागरिक को शामिल करें।
- जिला कलेक्टर (DM) का रोल: जिला कलेक्टरों को कचरा प्रबंधन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का ऑडिट करने और अपने क्षेत्र में कचरा प्रबंधन की स्थापना व निष्पादन की निगरानी करने का अधिकार दिया गया है।
- फोटोग्राफिक सबूत (Photographic Evidence): स्थानीय निकायों (Local Bodies) को कचरा हटाने और बुनियादी ढांचे की तैयारी की असली प्रगति सत्यापित करने के लिए अनुपालन रिपोर्ट के साथ फोटोग्राफिक साक्ष्य ईमेल के जरिए जिला कलेक्टर के ऑफिस में भेजने होंगे।
उल्लंघन पर क्या होगी कार्रवाई?
कोर्ट ने साफ कर दिया है कि नियमों के उल्लंघन को अब सिर्फ एक प्रशासनिक चूक मानकर नहीं छोड़ा जाएगा।
- जुर्माना और क्रिमिनल केस: कचरा पैदा करने वालों या स्थानीय अधिकारियों द्वारा नियमों का पालन न करने पर तुरंत जुर्माना लगाया जाएगा। लगातार उल्लंघन पर 'पर्यावरण कानूनों' के तहत क्रिमिनल केस (Criminal prosecution) दर्ज होगा, जो उन सभी अधिकारियों तक फैलेगा जो अपनी निगरानी ड्यूटी में विफल रहते हैं।
- मोबाइल कोर्ट: रियल-टाइम उल्लंघन से निपटने के लिए 'मोबाइल कोर्ट' (Mobile Courts) की तैनाती पर भी विचार किया जा रहा है।
पर्यावरण को बचाने के लिए यह सुप्रीम कोर्ट का एक ऐतिहासिक कदम है। 1 अप्रैल 2026 से लागू हो रहे नए SWM नियमों के लिए यह फैसला एक सख्त चेतावनी है कि 'कचरा प्रबंधन' अब सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखना चाहिए। स्थानीय निकायों को जागरूकता अभियान चलाने और 31 मार्च तक भारी कचरा पैदा करने वालों (Bulk-waste generators) को इन नियमों के बारे में सूचित करने का भी निर्देश दिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) ❓
- Q: सुप्रीम कोर्ट का यह नया आदेश कब से प्रभावी माना जाएगा? A: कोर्ट ने ये दिशा-निर्देश 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो रहे 'SWM Rules 2026' की तैयारियों के हिस्से के रूप में दिए हैं।
- Q: यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा? A: यह आदेश भोपाल नगर निगम से जुड़े 'नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल' (NGT) के दो आदेशों के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिया गया।
पाठकों के लिए सवाल: क्या आपके शहर या वॉर्ड में कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां नियमित आती हैं और क्या गीला-सूखा कचरा अलग किया जाता है? अपनी राय और अपने शहर का हाल कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!
डिस्क्लेमर: यह खबर हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर दिए गए आदेश पर आधारित है। नियमों के कानूनी बदलावों की पूर्ण जानकारी के लिए आधिकारिक सरकारी नोटिफिकेशन का संदर्भ लें। #timelessindianews
Source Link: Hindustan Times
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