मुंबई: विशाल भारद्वाज की सिनेमाई दुनिया अंधेरे, खून और जुनून से भरी होती है। उनकी नई फिल्म 'O’ Romeo' भी इससे अछूती नहीं है। Critics की शुरुआती समीक्षाओं के अनुसार, शाहिद कपूर ने अपने अभिनय से एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे इस पीढ़ी के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं। हालाँकि, फिल्म की कहानी और रफ्तार (Pacing) ने दर्शकों के सबर का इम्तिहान लिया है। यह एक "रोमांटिक एक्शन ड्रामा" है जो कई जगहों पर भटकता हुआ महसूस होता है।
एक्टिंग 'सुपरहिट', कहानी 'एवरेज'
फिल्म को टुकड़ों में देखना एक शानदार अनुभव है, लेकिन पूरी फिल्म एक बोझ जैसी लगती है।
- शाहिद का 'सोर्स' (Soars): शाहिद कपूर ने एक इंटेंस और जुनूनी प्रेमी का किरदार निभाया है। उनकी आंखों का गुस्सा और दर्द स्क्रीन पर साफ झलकता है। समीक्षकों का कहना है कि वे इस फिल्म की डूबती नैया के लिए एकमात्र सहारा हैं।
- दिशाहीन कहानी: फिल्म को "meandering" (भटकती हुई) कहा गया है। पहले हाफ में जो रोमांच बनता है, वह दूसरे हाफ में सुस्त और उबाऊ (boring) हो जाता है।
- विजुअल्स और वाइब: भारद्वाज की फिल्मों की तरह यह भी "Brooding, Bloody and Beautiful" (गंभीर, खूनी और खूबसूरत) है। सिनेमेटोग्राफी शानदार है, जो आपको उस दुनिया में खींच लेती है।
यह भी पढ़ें: एशिया कप में 'आर-पार' की जंग! क्या 'राइजिंग स्टार्स' के बीच मचेगा तहलका?
'हैदर' और 'ओमकारा' का बोझ
विशाल भारद्वाज को शेक्सपियर के नाटकों को भारतीय पृष्ठभूमि में ढालने के लिए जाना जाता है (मकबूल-मैकबेथ, ओमकारा-ओथेलो, हैदर-हेलमेट)। 'O’ Romeo' से उम्मीदें आसमान पर थीं क्योंकि यह हैदर के बाद शाहिद के साथ उनका बड़ा प्रोजेक्ट था। समस्या यही है—फिल्ममेकर अपनी ही पिछली "महानता के बोझ" (Burdened by past brilliance) तले दब गए हैं। दर्शक हर सीन में हैदर जैसी गहराई ढूंढते हैं, जो यहाँ नदारद है।
खूबसूरत लेकिन थकाऊ
फिल्म समीक्षकों का मानना है कि विशाल भारद्वाज इस बार कहानी कहने (Storytelling) में चूक गए। एक वरिष्ठ समीक्षक ने लिखा, "यह फिल्म उन दर्शकों के लिए है जो सिनेमा को 'कला' मानते हैं, न कि मनोरंजन। इसमें खून-खराबा है, रोमांस है, लेकिन आत्मा गायब है। शाहिद चमकते हैं, लेकिन स्क्रिप्ट उन्हें नीचे खींच लेती है।"
यह भी पढ़ें: सावधान! क्या आपके पास भी है FD? अब इनकम टैक्स विभाग की आपकी हर पाई-पाई पर नजर
निष्कर्ष (Conclusion)
अगर आप शाहिद कपूर के फैन हैं और डार्क सिनेमा पसंद करते हैं, तो 'O’ Romeo' एक बार देखी जा सकती है। लेकिन अगर आप जब वी मेट जैसा रोमांस या ओमकारा जैसी कसी हुई स्क्रिप्ट की उम्मीद कर रहे हैं, तो आपको निराशा हाथ लगेगी। कुल मिलाकर, यह एक शानदार अवसर था जिसे धीमी गति और कमजोर लेखन ने बर्बाद कर दिया। #timelessindianews इसे 2.5/5 स्टार देता है।
पाठकों के लिए सवाल: क्या आप सिर्फ शाहिद कपूर की एक्टिंग के लिए बोरिंग फिल्म झेल सकते हैं? कमेंट्स में सच-सच बताएं!
⚡️ डिस्क्लेमर: यह समीक्षा फिल्म के प्रीमियर और उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। फिल्म को लेकर हर दर्शक की राय अलग हो सकती है। #timelessindianews
सोर्स लिंक:
Social Plugin