नई दिल्ली: फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को भारत में निवेश का सबसे सुरक्षित साधन माना जाता है, लेकिन अब यह सुरक्षा आयकर विभाग की कड़ी निगरानी के दायरे में आ गई है। Upstox की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार 'ड्रॉफ्ट रूल्स 2026' लाने की तैयारी में है, जिसके तहत बैंकों के लिए ग्राहकों के एफडी डेटा को आयकर विभाग के साथ साझा करना अनिवार्य कर दिया जाएगा। अब तक कई लोग अपनी एफडी की जानकारी छिपा ले जाते थे, लेकिन नए नियमों के बाद आपकी 'गुप्त बचत' का राज खुल सकता है।
आखिर क्या हैं ये नए ड्राफ्ट नियम?
इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता लाना और 'स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन' (SFT) के दायरे को बढ़ाना है।
- ऑटोमैटिक रिपोर्टिंग: अब बैंक एक निश्चित सीमा से अधिक की एफडी (आमतौर पर 10 लाख रुपये या उससे अधिक) की जानकारी स्वतः ही आयकर विभाग को भेज देंगे।
- ब्याज पर नजर: केवल मूलधन ही नहीं, बल्कि उस पर मिलने वाले ब्याज की भी सटीक रिपोर्टिंग होगी, जिससे टीडीएस (TDS) की गणना में हेरफेर संभव नहीं होगा।
- AIS/TIS अपडेट: यह सारी जानकारी आपके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) में तुरंत दिखाई देगी, जिससे इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय आप इसे छिपा नहीं पाएंगे।
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क्यों पड़ी इन कड़े नियमों की जरूरत?
पिछले कुछ वर्षों में आयकर विभाग ने पाया कि बड़ी संख्या में लोग अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा एफडी में निवेश करते हैं, लेकिन उस पर मिलने वाले ब्याज को अपनी कुल आय में नहीं दर्शाते। 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, करोड़ों रुपये का ब्याज 'अघोषित आय' के रूप में रह जाता था। डिजिटल इंडिया और फेसलेस असेसमेंट की दिशा में बढ़ते हुए, सरकार अब डेटा एनालिटिक्स का उपयोग कर रही है ताकि टैक्स चोरी के रास्तों को हमेशा के लिए बंद किया जा सके।
ईमानदार टैक्सपेयर को डरने की जरूरत नहीं
टैक्स एक्सपर्ट सीए अनिरुद्ध गुप्ता के अनुसार, "यह कदम उन लोगों के लिए मुश्किल पैदा करेगा जो अपनी संपत्तियों को छिपाते रहे हैं। हालांकि, मध्यम वर्गीय और ईमानदार टैक्सपेयर्स के लिए यह अच्छी खबर है क्योंकि अब उन्हें मैन्युअल रूप से डेटा फीड करने की जरूरत नहीं होगी, सब कुछ पहले से भरा हुआ (Pre-filled) आएगा।" विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इससे वरिष्ठ नागरिकों को अपनी एफडी लिमिट को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा ताकि वे अनजाने में आयकर के नोटिस के दायरे में न आ जाएं।
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निष्कर्ष (Conclusion)
'ड्रॉफ्ट रूल्स 2026' वित्तीय अनुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। आपकी एफडी अब केवल बैंक और आपके बीच का मामला नहीं रही, बल्कि आयकर विभाग भी इसमें एक 'साइलेंट पार्टनर' की तरह मौजूद है। यदि आपका निवेश पारदर्शी है, तो चिंता की कोई बात नहीं है, लेकिन यदि आप अब भी पुराने तरीकों से टैक्स बचाने की सोच रहे हैं, तो संभल जाने का वक्त आ गया है। #timelessindianews आपको ऐसी ही हर महत्वपूर्ण अपडेट से अवगत कराता रहेगा।
पाठकों के लिए सवाल: क्या आपको लगता है कि एफडी की हर जानकारी सरकार के पास होना आपकी प्राइवेसी का उल्लंघन है? अपनी राय कमेंट्स में साझा करें!
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