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Pam Bondi - Epstein Files Hearing' पर अमेरिकी संसद में बवाल! पाम बोंडी और जैस्मीन क्रॉकेट के बीच तीखी झड़प; क्या रसूखदारों को बचाने की हो रही है कोशिश?

Dramatic political hearing setup with committee members questioning a witness under bright chamber lights, blurred nameplates, serious mood.


वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका की होने वाली अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी (Pam Bondi) की सीनेट सुनवाई ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार, जेफ्री एपस्टीन (Jeffrey Epstein) के काले कारनामों की फाइलों को सार्वजनिक करने को लेकर हुई इस सुनवाई में जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला। डेमोक्रेट सांसदों, विशेष रूप से जैस्मीन क्रॉकेट (Jasmine Crockett) और टेड लियू (Ted Lieu) ने पाम बोंडी को उनके पुराने रिकॉर्ड को लेकर आड़े हाथों लिया। यह सुनवाई केवल एक नियुक्ति की प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस 'सच' को बाहर लाने की जंग बन गई है जिसे दशकों से दबाया गया है।

पाम बोंडी और जैस्मीन क्रॉकेट के बीच 'महायुद्ध'

सुनवाई के दौरान माहौल तब गरमा गया जब जैस्मीन क्रॉकेट ने पाम बोंडी के उन दावों पर सवाल उठाए कि वे पारदर्शिता चाहती हैं।

  • तीखे सवाल: क्रॉकेट ने बोंडी से पूछा कि जब वे फ्लोरिडा की अटॉर्नी जनरल थीं, तब उन्होंने एपस्टीन के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की?
  • बोंडी का बचाव: पाम बोंडी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में कानून का पूरी तरह पालन किया गया था। उन्होंने खुद को 'पीड़ितों का समर्थक' बताया।
  • टेड लियू का प्रहार: टेड लियू ने बोंडी के उन बयानों को याद दिलाया जहाँ उन्होंने पहले इस मामले में नरमी बरतने की बात कही थी।

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2008 का वो विवादित समझौता

विवाद की जड़ 2008 के उस 'नॉन-प्रोसेक्यूशन एग्रीमेंट' (Non-Prosecution Agreement) में छिपी है, जिसने एपस्टीन को कड़ी सजा से बचा लिया था। पाम बोंडी पर आरोप लगते रहे हैं कि उनके कार्यकाल के दौरान एपस्टीन के नेटवर्क को राजनीतिक संरक्षण मिला। अब, जब डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें देश की सबसे बड़ी कानूनी अधिकारी (Attorney General) बनाने के लिए नामित किया है, तो पुरानी फाइलें फिर से खुल गई हैं। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि एपस्टीन फाइल्स में दुनिया के कई शक्तिशाली राजनेताओं और व्यापारियों के नाम दर्ज हैं।

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पारदर्शिता या केवल राजनीति?

राजनीतिक विश्लेषक जॉन मिलर के अनुसार, "पाम बोंडी की नियुक्ति की राह आसान नहीं होगी। एपस्टीन मामला एक ऐसा 'पेंडोरा बॉक्स' है जिसे जो भी छूता है, वह विवादों में घिर जाता है।" विशेषज्ञों का मानना है कि जैस्मीन क्रॉकेट ने इस सुनवाई के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि अमेरिकी जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि उन 30 लाख पेजों का पूरा सच देखना चाहती है।

सुनवाई के प्रमुख बिंदु

प्रमुख पात्र (Key Players)भूमिका/रुख (Stance)मुख्य मुद्दा (Key Issue)
पाम बोंडीअटॉर्नी जनरल नामितपारदर्शिता का वादा, लेकिन पुराने रिकॉर्ड पर घिरीं।
जैस्मीन क्रॉकेटडेमोक्रेट प्रतिनिधिबोंडी की निष्पक्षता और एपस्टीन से संबंधों पर सवाल।
टेड लियूडेमोक्रेट प्रतिनिधिबोंडी के पिछले बयानों में विरोधाभास को उजागर किया।
एपस्टीन फाइल्समुख्य विषय30 लाख पेजों को सार्वजनिक करने की कानूनी प्रक्रिया।


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निष्कर्ष (Conclusion)

पाम बोंडी की यह सुनवाई साबित करती है कि 'एपस्टीन फाइल्स' केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वर्तमान राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा हैं। क्या पाम बोंडी अटॉर्नी जनरल बनकर उन फाइलों को पूरी तरह सार्वजनिक करेंगी या रसूखदारों के राज दबे रह जाएंगे? #timelessindianews इस मामले के हर कानूनी मोड़ पर पैनी नजर बनाए हुए है।

पाठकों के लिए सवाल: क्या आपको लगता है कि पाम बोंडी को अटॉर्नी जनरल बनाना एपस्टीन मामले की जांच को प्रभावित करेगा? कमेंट्स में अपनी राय दें!

⚡️ डिस्क्लेमर: यह लेख Al Jazeera की रिपोर्ट और अमेरिकी संसद की कार्यवाही पर आधारित है। पाम बोंडी पर लगे आरोप अभी चर्चा का विषय हैं और किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी। #timelessindianews

सोर्स लिंक: अल जज़ीरा - पाम बोंडी एपस्टीन हियरिंग: मुख्य बातें


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