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India-Poland Row: विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पोलैंड के मंत्री के बीच तीखी बहस; पाकिस्तान और रूस को लेकर छिड़ी 'जुबानी जंग', जयशंकर ने दिया मुंहतोड़ जवाब; पूरी खबर

Split image of Indian FM S. Jaishankar and Polish FM Radoslaw Sikorski during a serious diplomatic meeting with national flags in the background



नई दिल्ली/वारसॉ: भारत और पोलैंड के रिश्तों में अचानक कड़वाहट आ गई है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच तीखी नोकझोंक ने राजनयिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। द हिंदू (The Hindu) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोर्स्की के बीच पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे आतंकवाद और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर खुलेआम बहस हुई है। जयशंकर ने पोलैंड को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए 'दोहरे मापदंड' छोड़ने की सलाह दी है।

आतंकवाद पर पोलैंड को जयशंकर की खरी-खरी बहस की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तान के साथ पोलैंड की बढ़ती नजदीकियों पर सवाल उठे। एस. जयशंकर ने दो टूक कहा कि पोलैंड को इस क्षेत्र में आतंकवाद को 'ईंधन' (Fuel) देने में मदद नहीं करनी चाहिए। जयशंकर का इशारा पाकिस्तान को दी जाने वाली किसी भी तरह की सैन्य या कूटनीतिक मदद की ओर था। उन्होंने साफ किया कि भारत अपनी सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर कोई समझौता नहीं करेगा।


रूस और तेल प्रतिबंधों पर छिड़ा विवाद यूरोपीय संघ (EU) द्वारा रूस पर लगाए गए तेल प्रतिबंधों को लेकर भी माहौल गरमा गया। जयशंकर ने इन प्रतिबंधों को 'सिलेक्टिव टारगेटिंग' (Selective Targeting) करार दिया। उन्होंने कहा कि यूरोप अपनी जरूरत के हिसाब से नियम बनाता है, जो भारत जैसे देशों के हितों के खिलाफ है। दूसरी ओर, पोलैंड के मंत्री सिकोर्स्की ने रूस में होने वाले 'जापाद' (Zapad) युद्धाभ्यास में भारत की भागीदारी को 'खतरनाक' और 'धमकी भरा' बताया।

क्या भारत-पोलैंड संबंधों पर पड़ेगा असर?

पोलैंड लंबे समय से यूक्रेन का कट्टर समर्थक रहा है, जबकि भारत ने रूस के साथ अपने पुराने रिश्तों को संतुलित बनाए रखा है। पोलैंड का मानना है कि भारत का रूस के साथ सैन्य अभ्यास करना यूरोप की सुरक्षा के लिए खतरा है। वहीं, भारत का तर्क है कि वह अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का पालन कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस 'डिप्लोमैटिक स्पैट' से आने वाले समय में भारत और यूरोपीय संघ के व्यापारिक रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है।


निष्कर्ष: विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह कड़ा रुख एक बार फिर 'नए भारत' की उस छवि को दर्शाता है जो किसी भी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है। हालांकि, पोलैंड जैसे महत्वपूर्ण यूरोपीय देश के साथ इस तरह का तनाव भविष्य में रणनीतिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। #timelessindianews इस मामले की हर अपडेट आप तक पहुँचाता रहेगा।


⚡️ डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह रिपोर्ट 'द हिंदू' और अंतरराष्ट्रीय राजनयिक बयानों पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय संबंध गतिशील होते हैं और आधिकारिक बातचीत के बाद इनमें बदलाव संभव है। #timelessindianews

Source : Thehindu
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