आज पूरा देश और दुनिया क्रिसमस का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मना रहा है। भारत, जो अपनी विविध संस्कृतियों के लिए जाना जाता है, यहाँ कुछ ऐसे प्राचीन और भव्य चर्च (गिरजाघर) मौजूद हैं जिनका इतिहास सदियों पुराना है। ये केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि वास्तुकला के बेजोड़ नमूने भी हैं।
भारत के प्रमुख ऐतिहासिक चर्च और उनकी विशेषताएं:
- सेंट थॉमस चर्च, पालूर (केरल): भारत के सबसे पुराने चर्चों में से एक, जिसकी नींव 52 ईस्वी में सेंट थॉमस ने रखी थी। यह चर्च भारत में ईसाई धर्म के शुरुआती आगमन का प्रतीक माना जाता है।
- बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस (गोवा): 16वीं शताब्दी में निर्मित यह चर्च यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यहाँ सेंट फ्रांसिस जेवियर के पार्थिव अवशेष रखे गए हैं। इसकी वास्तुकला बारोक (Baroque) शैली का अद्भुत उदाहरण है।
- सेंट फिलोमेना चर्च, मैसूर (कर्नाटक): यह भारत के सबसे ऊंचे चर्चों में से एक है। इसे 1936 में जर्मनी के कोलोन कैथेड्रल से प्रेरित होकर बनाया गया था। इसकी गोथिक शैली की मीनारें मैसूर के क्षितिज पर अलग ही चमकती हैं।
- सेंट पॉल कैथेड्रल, कोलकाता (पश्चिम बंगाल): इंडो-गोथिक शैली में बना यह चर्च एशिया का पहला एंग्लिकन कैथेड्रल है। इसकी कांच की खिड़कियों पर की गई नक्काशी और भव्य हॉल शांति का अनुभव कराते हैं।
- अवर लेडी ऑफ इमैकुलेट कॉन्सेप्शन, पणजी (गोवा): 1541 में बने इस चर्च की विशाल दोहरी सीढ़ियां और पूरी तरह सफेद रंग इसे फिल्मों और फोटोग्राफी के लिए सबसे पसंदीदा स्थल बनाता है।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व: भारत के ये चर्च केवल ईंट और पत्थर की इमारतें नहीं हैं, बल्कि ये पुर्तगाली, ब्रिटिश और फ्रांसीसी वास्तुकला के भारत पर पड़े प्रभाव की गवाही देते हैं। हर साल क्रिसमस के मौके पर इन चर्चों को हजारों मोमबत्तियों और रोशनियों से सजाया जाता है, जिसे देखने दुनिया भर से लोग आते हैं।
पूरी खबर का निष्कर्ष यह है कि भारत की सांस्कृतिक विविधता को समझने के लिए इन ऐतिहासिक धरोहरों को जानना बेहद जरूरी है। यह न केवल आस्था का केंद्र हैं, बल्कि भारत के इतिहास के महत्वपूर्ण पन्ने भी हैं।
⚡️ डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख ऐतिहासिक तथ्यों और सांस्कृतिक रिपोर्टों पर आधारित है। विभिन्न चर्चों के निर्माण की तिथियां अलग-अलग ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। #TimelessIndianews
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