नई दिल्ली/नोम पेन्ह: भारत ने कंबोडिया में एक हिंदू देवता की मूर्ति को ध्वस्त किए जाने की घटना पर अपनी गहरी नाराजगी और आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आने के बाद, जिसमें एक प्राचीन हिंदू मूर्ति को अपमानजनक तरीके से हटाते और तोड़ते हुए दिखाया गया था, विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है।
घटना और भारत की प्रतिक्रिया की मुख्य बातें:
- कड़ा आधिकारिक विरोध: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि यह कृत्य न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है, बल्कि भारत और कंबोडिया के साझा सांस्कृतिक इतिहास का भी अपमान है।
- कंबोडिया सरकार से संपर्क: भारतीय दूतावास ने कंबोडियाई अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाया है और उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा है कि हिंदू धार्मिक स्थलों और प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- ऐतिहासिक संबंध: कंबोडिया में दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर 'अंकोरवाट' स्थित है। भारत ने याद दिलाया कि दोनों देशों के बीच सदियों पुराना गहरा सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव रहा है, जिसे ऐसी घटनाएं कमजोर कर सकती हैं।
- सोशल मीडिया पर आक्रोश: मूर्ति के साथ किए गए व्यवहार का वीडियो वायरल होने के बाद दुनिया भर के हिंदू समुदायों और संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है।
- जांच की मांग: भारत ने कंबोडियाई प्रशासन से इस बर्बरता के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
सांस्कृतिक विरासत का महत्व: भारत और कंबोडिया लंबे समय से मंदिरों के जीर्णोद्धार (Restoration) के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। भारत सरकार ने कंबोडियाई अधिकारियों को याद दिलाया है कि धार्मिक सहिष्णुता और ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
पूरी खबर का निष्कर्ष यह है कि भारत अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी मुखर है। इस घटना ने दोनों देशों के कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और अब सबकी नज़र कंबोडियाई सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
⚡️ डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी बयानों पर आधारित है। धार्मिक और कूटनीतिक मामलों में संवेदनशीलता का ध्यान रखें। #TimelessIndianews
Source: NDTV World
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