मुंबई: बॉलीवुड के 'एवरग्रीन' अभिनेता अनिल कपूर ने अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'नायक' को लेकर एक ऐसी सच्चाई साझा की है, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। The Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म 'नायक' में शिवाजी राव का किरदार निभाने के बाद, अनिल कपूर को असल जिंदगी में कई राजनीतिक दलों से बड़े पदों के प्रस्ताव मिले थे। लोग उन्हें वास्तव में एक राजनेता के रूप में देखना चाहते थे। लेकिन अनिल कपूर का प्लान कुछ और ही था।
जब रील लाइफ 'नायक' को मिला रियल लाइफ ऑफर
फिल्म 'नायक' साल 2001 में रिलीज हुई थी, लेकिन इसका असर दशकों तक रहा। अनिल कपूर ने हाल ही में खुलासा किया कि:
- राजनीतिक प्रस्ताव: फिल्म की सफलता के बाद, कई प्रमुख राजनीतिक दलों ने उनसे संपर्क किया और उन्हें चुनाव लड़ने या पार्टी का चेहरा बनने का प्रस्ताव दिया।
- एक्टर का नजरिया: अनिल कपूर का मानना था कि राजनीति एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है जिसके लिए 24 घंटे का समर्पण चाहिए। उन्होंने महसूस किया कि उनका असली जुनून अभिनय (Acting) है, राजनीति नहीं।
- प्लान ऑफ एक्शन: उन्होंने बड़ी ही विनम्रता से इन ऑफर्स को ठुकरा दिया। उनका मानना था कि वे फिल्मों के जरिए समाज में जो बदलाव ला सकते हैं, वह उनके लिए अधिक संतोषजनक है।
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'नायक' का कल्ट क्लासिक बनना
एस. शंकर द्वारा निर्देशित 'नायक' तमिल फिल्म 'मुधलवन' की रीमेक थी। रिलीज के समय फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर औसत प्रदर्शन किया था, लेकिन टीवी पर आने के बाद यह एक 'कल्ट क्लासिक' बन गई। फिल्म में एक पत्रकार का एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनना और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाना दर्शकों को बेहद पसंद आया। आज भी जब देश में कहीं राजनीतिक उथल-पुथल होती है, तो सोशल मीडिया पर 'नायक' के मीम्स और अनिल कपूर के डायलॉग्स वायरल होने लगते हैं।
कलाकार और राजनीति का गहरा रिश्ता
फिल्म समीक्षकों का मानना है कि भारत में सिनेमा और राजनीति हमेशा एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं। विशेषज्ञ राजेश मेहता के अनुसार, "अनिल कपूर ने उस समय राजनीति में न जाकर अपनी कला पर ध्यान केंद्रित किया, जो एक सही फैसला था। अक्सर कलाकार लोकप्रियता के नशे में राजनीति में चले जाते हैं, लेकिन वहां सफल नहीं हो पाते। अनिल कपूर ने 'नायक' की छवि को पर्दे तक सीमित रखकर अपनी गरिमा बनाए रखी।"
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निष्कर्ष (Conclusion)
अनिल कपूर आज भी अपनी ऊर्जा और अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं। 'नायक' के ऑफर्स को ठुकराना यह दर्शाता है कि वे अपने काम के प्रति कितने ईमानदार हैं। भले ही वे असल जिंदगी में मुख्यमंत्री नहीं बने, लेकिन शिवाजी राव के रूप में वे हमेशा भारतीय सिनेमा के सबसे चहेते 'नायक' रहेंगे। #timelessindianews आपको सिनेमा और समाज की ऐसी ही अनकही कहानियों से रूबरू कराता रहेगा।
पाठकों के लिए सवाल: क्या आपको लगता है कि अनिल कपूर अगर राजनीति में आते, तो वे एक अच्छे नेता साबित होते? कमेंट्स में अपनी राय जरूर लिखें!
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मीडिया साक्षात्कारों और रिपोर्ट्स पर आधारित है। लेख का उद्देश्य केवल जानकारी साझा करना है। #timelessindianews किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करता है।
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