ओटावा (कनाडा): वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है। Health and Me की रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा की शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया है कि हालांकि सरकार द्वारा लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों ने नागरिकों के 'मोबिलिटी राइट्स' (आवाजाही के अधिकार) का उल्लंघन किया था, लेकिन महामारी की अभूतपूर्व स्थिति को देखते हुए ये प्रतिबंध 'उचित सीमा' (Reasonable Limits) के भीतर थे। अदालत के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
क्या अधिकार सुरक्षा से बड़े हैं?
अदालत के सामने मुख्य चुनौती कनाडाई चार्टर ऑफ राइट्स के 'सेक्शन 6' (Section 6) और 'सेक्शन 1' (Section 1) के बीच संतुलन बनाना था।
- अधिकारों का हनन: कोर्ट ने स्वीकार किया कि नागरिकों को देश के भीतर घूमने और बाहर जाने से रोकना उनके मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन था।
- तर्कसंगत सीमाएं: न्यायाधीशों ने तर्क दिया कि 'सेक्शन 1' सरकार को आपातकाल के दौरान अधिकारों को सीमित करने की शक्ति देता है, बशर्ते वह सार्वजनिक भलाई (जैसे जीवन बचाना) के लिए हो।
- साक्ष्य का महत्व: सरकार द्वारा पेश किए गए वैज्ञानिक आंकड़ों ने यह साबित करने में मदद की कि उन प्रतिबंधों के बिना मौतों का आंकड़ा और भी भयानक हो सकता था।
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जब ठहर गया था कनाडा
2020 से 2022 के बीच, कनाडा ने दुनिया के सबसे कड़े यात्रा नियमों को लागू किया था। इसमें 'ArriveCAN' ऐप की अनिवार्यता, गैर-जरूरी यात्रा पर प्रतिबंध और अनिवार्य क्वारंटाइन शामिल थे। कई नागरिक समूहों और स्वतंत्रता अधिवक्ताओं ने इसे 'तानाशाही' करार देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनका तर्क था कि सरकार ने डर का माहौल बनाकर लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचल दिया है। आज का यह फैसला उन सभी याचिकाओं का अंतिम जवाब माना जा रहा है।
"भविष्य के लिए एक कानूनी मिसाल"
संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ प्रो. डेविड मिलर के अनुसार, "यह फैसला भविष्य की सरकारों के लिए एक ब्लूप्रिंट का काम करेगा। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता असीमित नहीं है; सामूहिक जीवन की रक्षा के लिए इसे अस्थायी रूप से रोका जा सकता है।" वहीं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला सरकारों को भविष्य में भी 'आपातकाल' के नाम पर अधिकारों के दमन की छूट दे सकता है।
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निष्कर्ष (Conclusion)
कनाडा सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि असाधारण समय में असाधारण फैसलों की आवश्यकता होती है। हालांकि, यह बहस हमेशा बनी रहेगी कि सुरक्षा के नाम पर स्वतंत्रता की बलि किस हद तक दी जानी चाहिए। यह फैसला न केवल कनाडा के कानून को प्रभावित करेगा, बल्कि दुनिया भर के उन देशों के लिए भी एक संदर्भ बिंदु बनेगा जो समान कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। #timelessindianews आपको वैश्विक न्याय और अधिकारों की ऐसी ही महत्वपूर्ण खबरों से अपडेट रखता रहेगा।
पाठकों के लिए सवाल: क्या आपको लगता है कि किसी भी स्थिति में सरकार को आपके घूमने-फिरने की आजादी को सीमित करने का हक है? कमेंट्स में अपनी राय साझा करें!
डिस्क्लेमर: यह लेख अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और कनाडा के सर्वोच्च न्यायालय के सार्वजनिक फैसलों पर आधारित है। लेख का उद्देश्य केवल कानूनी और सामाजिक जानकारी साझा करना है। #timelessindianews
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