वॉशिंगटन (Washington): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) से उनके दूसरे कार्यकाल का अब तक का सबसे बड़ा कानूनी झटका लगा है। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के उस फैसले को असंवैधानिक करार दिया है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय आपातकाल कानून का इस्तेमाल करते हुए दुनिया भर के देशों (कनाडा, मेक्सिको, चीन आदि) पर भारी टैरिफ (आयात शुल्क) थोप दिए थे। इस ऐतिहासिक फैसले ने ट्रंप के 'ग्लोबल ट्रेड एजेंडे' पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला? (Deep Analysis) सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रपति को आपातकालीन शक्तियों के नाम पर असीमित अधिकार नहीं मिले हैं।
- कोर्ट का सख्त रुख: चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स (John Roberts) ने बहुमत का फैसला लिखते हुए साफ किया कि अमेरिकी संविधान "बहुत स्पष्ट रूप से" टैक्स और टैरिफ पर कांग्रेस (संसद) को अधिकार देता है। उन्होंने लिखा कि संविधान निर्माताओं ने टैक्स लगाने की कोई भी शक्ति कार्यपालिका (राष्ट्रपति) को नहीं दी है।
- IEEPA का गलत इस्तेमाल: ट्रंप प्रशासन ने 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट' (IEEPA) का हवाला देकर 10% ग्लोबल टैरिफ और 'लिबरेशन डे' (Liberation Day) ड्यूटी लगाई थी। अदालत ने पाया कि यह कानून राष्ट्रपति को इस तरह के मनमाने टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।
- भारतीय मूल के वकील की जीत: इस केस में छोटे कारोबारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रमुख भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल (Neal Katyal) ने इसे "पूर्ण और समग्र जीत" (complete and total victory) बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला हमारे संवैधानिक मूल्यों की पुष्टि करता है कि अमेरिकी जनता पर टैक्स लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, किसी एक व्यक्ति के पास नहीं।
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ट्रंप ने क्यों लगाए थे ये टैरिफ?
राष्ट्रपति ट्रंप ने 'राष्ट्रीय सुरक्षा' और 'फेंटेनाइल' (fentanyl) जैसी घातक ड्रग्स की तस्करी रोकने के नाम पर कनाडा, मेक्सिको और चीन पर भारी आयात शुल्क (35% तक) लगाने के लिए इस आपातकालीन कानून का इस्तेमाल किया था। उनका तर्क था कि इस टैरिफ से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और व्यापार घाटा कम होगा।
आगे क्या होगा? "हम दूसरा टूल इस्तेमाल करेंगे"
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भी ट्रंप प्रशासन हार मानने को तैयार नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप ने फैसले के बाद कहा कि वे अब टैरिफ लगाने के लिए 'सेक्शन 122' (Section 122) जैसे अन्य व्यापारिक अधिकारों का सहारा लेंगे। उधर, 'कनाडाई चैंबर ऑफ कॉमर्स' ने चेतावनी दी है कि यह फैसला कोई अंत नहीं है और कनाडा को अब अमेरिकी व्यापार के नए और अधिक विघटनकारी तरीकों (blunter mechanisms) का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी खबर है। यह इस बात का सबूत है कि अमेरिका का 'चेक एंड बैलेंस' (Checks and Balances) सिस्टम आज भी मजबूती से काम कर रहा है। अब पूरी दुनिया की नज़रें इस बात पर हैं कि ट्रंप प्रशासन कांग्रेस की मंजूरी के बिना अपने 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे को कैसे आगे बढ़ाता है।
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यह रहा इस खबर से जुड़ा एक प्रासंगिक वीडियो जो आप देख सकते हैं:
सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले और इसके पीछे के कारणों को विस्तार से समझने के लिए यह वीडियो देखें:
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) ❓
- Q: क्या ट्रंप के लगाए गए सभी टैरिफ खत्म हो जाएंगे? A: नहीं। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केवल IEEPA कानून के तहत लगाए गए टैरिफ पर लागू होता है। स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल जैसी इंडस्ट्रीज़ पर अलग कानूनों के तहत लगाए गए टैरिफ जारी रहेंगे।
- Q: क्या छोटे कारोबारियों को उनका पैसा (Refund) वापस मिलेगा? A: सुप्रीम कोर्ट के बहुमत के फैसले ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि जिन कंपनियों ने ये टैरिफ भरे हैं, उन्हें रिफंड मिलेगा या नहीं।
पाठकों के लिए सवाल: क्या आपको लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से दुनिया भर में चल रही 'ट्रेड वॉर' (Trade War) शांत होगी, या ट्रंप टैरिफ लगाने का कोई नया तरीका निकाल लेंगे? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें!
डिस्क्लेमर: यह लेख प्रमुख अमेरिकी और कनाडाई मीडिया रिपोर्ट्स (CNN, The Associated Press, The Times of India) पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों और टैरिफ नियमों में समय-समय पर बदलाव संभव हैं। #timelessindianews
Source Link: CNN / Hindustan Times - US Supreme Court strikes down Trump tariffs
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