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Grammy 2026: उस्ताद अमजद अली खान ने बेटों के साथ रचा इतिहास! पहली ग्रैमी जीत पर हुए भावुक; जानें भारत के इस 'सुरमयी' गौरव की पूरी कहानी; पूरी खबर

Sarod maestro Ustad Amjad Ali Khan with sons Amaan and Ayaan Ali Bangash holding their first Grammy Award 2026 trophies, celebrating Indian classical music's global victory.


लॉस एंजिल्स/नई दिल्ली: भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में एक नया सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। सरोद सम्राट उस्ताद अमजद अली खान और उनके बेटों, अमान अली बंगश और अयान अली बंगश ने संगीत की दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान 'ग्रैमी अवॉर्ड' जीतकर देश का मान बढ़ाया है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रैमी 2026 के मंच पर अपनी पहली जीत के बाद उस्ताद ने गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने इस उपलब्धि को भारतीय संस्कृति और संगीत की 'अमर शक्ति' को समर्पित किया है।

ग्रैमी की जीत और सरोद का जादू

इस साल के ग्रैमी अवॉर्ड्स में भारतीय संगीत की उपस्थिति बेहद प्रभावशाली रही। अमजद अली खान और उनके बेटों की जीत के पीछे के महत्वपूर्ण पहलू यहाँ दिए गए हैं:

  • पारंपरिक और आधुनिक का संगम: उनकी एल्बम ने सरोद की पारंपरिक धुनों को आधुनिक संगीत के साथ इस तरह पिरोया कि वैश्विक जूरी (Global Jury) मंत्रमुग्ध हो गई।
  • पारिवारिक विरासत: यह संभवतः पहला मौका है जब किसी भारतीय पिता और उनके दो बेटों ने एक साथ इस श्रेणी में ग्रैमी हासिल की है। यह संगीत की उस गुरु-शिष्य परंपरा की जीत है जो सदियों से भारत में चली आ रही है।
  • वैश्विक पहचान: यह जीत साबित करती है कि भाषा की सीमाओं से परे, शुद्ध वाद्य संगीत (Instrumental Music) आज भी दुनिया के दिल को छूने की ताकत रखता है।

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ऐतिहासिक संदर्भ: सरोद का घराना और संघर्ष

उस्ताद अमजद अली खान ग्वालियर के प्रसिद्ध 'सेनिया बंगश घराने' की छठी पीढ़ी के कलाकार हैं। उन्होंने सरोद वादन की तकनीक में क्रांतिकारी बदलाव किए, जिससे यह वाद्य यंत्र गायकी के और करीब आ गया। अमान और अयान ने बचपन से ही अपने पिता की कड़ी निगरानी में शिक्षा प्राप्त की। पिछले कई दशकों में इस परिवार ने दुनिया के हर बड़े मंच (जैसे कार्नेगी हॉल, रॉयल अल्बर्ट हॉल) पर प्रदर्शन किया है, लेकिन ग्रैमी का यह सम्मान उनके करियर में एक मील का पत्थर है जो उनकी सालों की तपस्या का फल है।

भारतीय संगीत का पुनर्जागरण

संगीत समीक्षकों और कलाकारों ने इस जीत को 'ऐतिहासिक' करार दिया है। संगीत विशेषज्ञ पंडित रविंद्र शर्मा के अनुसार, "अमजद अली खान साहब की जीत यह दर्शाती है कि पश्चिम अब भारतीय शास्त्रीय संगीत को केवल 'लोक संगीत' नहीं, बल्कि 'अत्याधुनिक कला' के रूप में देख रहा है।" विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीत से भारत के युवा शास्त्रीय संगीतकारों को एक नई ऊर्जा और वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने का हौसला मिलेगा।

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उस्ताद की भावुक प्रतिक्रिया

जीत के बाद उस्ताद ने कहा, "हम गहराई से विनम्र (Deeply Humbled) महसूस कर रहे हैं। यह ग्रैमी केवल हमारे लिए नहीं, बल्कि हर उस भारतीय के लिए है जो संगीत से प्यार करता है।"

निष्कर्ष (Conclusion)

उस्ताद अमजद अली खान, अमान और अयान की यह ग्रैमी जीत संगीत की सीमाओं को लांघने और दो पीढ़ियों के बीच के अटूट बंधन की कहानी है। यह पल भारतीय शास्त्रीय संगीत के भविष्य को और भी उज्जवल बनाता है। #timelessindianews की ओर से इस गौरवशाली परिवार को हार्दिक बधाई।

पाठकों के लिए सवाल: क्या आपको लगता है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत को फिल्मों के गानों से ज्यादा बढ़ावा मिलना चाहिए? कमेंट्स में अपनी राय ज़रूर साझा करें!


⚡️ डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट समाचार स्रोतों और NDTV की न्यूज़ अपडेट पर आधारित है। संगीतकारों के विस्तृत साक्षात्कार और आधिकारिक पुरस्कार विवरण के लिए ग्रैमी की वेबसाइट देखें। #timelessindianews

Source: NDTV 

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