नई दिल्ली/मुंबई (New Delhi/Mumbai): साल 2026 आ चुका है। भारत की सड़कों पर अब हरी नंबर प्लेट वाली गाड़ियां आम हो गई हैं। पेट्रोल पंपों पर कतारें छोटी हुई हैं और चार्जिंग स्टेशन बढ़ गए हैं। लेकिन इस 'इलेक्ट्रिक क्रांति' की चमक के पीछे एक अंधेरा सच भी छिपा है, जो अब धीरे-धीरे बाहर आ रहा है। 5 साल पहले जिन लोगों ने उत्साह में EV खरीदी थी, आज वे अपनी गाड़ी बेचने जा रहे हैं तो उन्हें जो कीमत (Resale Value) मिल रही है, उसने पूरे बाजार को सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्या EV खरीदना अब फायदे का नहीं, बल्कि घाटे का सौदा है?
फायदा 'दिखता' है, नुकसान 'छिपता' है
इसमें कोई शक नहीं कि EV चलाने का खर्च (Running Cost) पेट्रोल के मुकाबले बेहद कम है। आज भी पेट्रोल ₹110/लीटर है, जबकि EV ₹1.5 प्रति किलोमीटर में चलती है। लेकिन असली खेल 'ओनरशिप कॉस्ट' (Total Cost of Ownership) का है।
- सबसे बड़ा डर - रीसेल वैल्यू (Resale Value Shock): 2026 की रिपोर्ट्स बता रही हैं कि 5 साल पुरानी पेट्रोल कार की तुलना में 5 साल पुरानी EV की रीसेल वैल्यू 30-40% तक कम मिल रही है। कारण? सेकेंड हैंड खरीदार पुरानी बैटरी पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
- बैटरी रिप्लेसमेंट का भूत (Battery Anxiety 2.0): अब 'रेंज एंजायटी' खत्म हो गई है, लेकिन 'बैटरी कॉस्ट एंजायटी' शुरू हो गई है। 8 साल की वारंटी के बाद अगर बैटरी खराब हुई, तो उसका खर्च गाड़ी की मौजूदा कीमत का आधा हो सकता है (₹4-6 लाख रुपये)।
- सब्सिडी का अंत: सरकार ने अब फेम (FAME) सब्सिडी लगभग बंद कर दी है, जिससे EVs की शुरुआती कीमत पेट्रोल कारों से अभी भी 3-4 लाख रुपये ज्यादा है।
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2021 का उत्साह vs 2026 की हकीकत
याद कीजिए 2021-22 का दौर, जब पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे थे और हर कोई EV बुक कर रहा था। तब सोचा गया था कि पेट्रोल के पैसे बचाकर गाड़ी की ज्यादा कीमत वसूल हो जाएगी। लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से बदलेगी कि 2022 की EV, 2026 में 'आउटडेटेड' (पुरानी तकनीक) लगेगी, जिससे उसके दाम गिर जाएंगे। आज 500KM रेंज आम है, जबकि पुराने मॉडल 300KM वाले थे।
यह किसके लिए है और किसके लिए नहीं?
ऑटो मार्केट एनालिस्ट राजीव कपूर कहते हैं, "EV अब भी उन लोगों के लिए फायदे का सौदा है जो एक गाड़ी को 8-10 साल तक रखते हैं और जिनका रोजाना का चलना (Daily Running) 80-100 किलोमीटर से ज्यादा है। लेकिन अगर आप हर 3-4 साल में गाड़ी बदलते हैं, तो EV की गिरती रीसेल वैल्यू आपको बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है। अब यह इमोशनल नहीं, कैलकुलेटेड फैसला होना चाहिए।"
भविष्य इलेक्ट्रिक का ही है, इसमें दो राय नहीं। लेकिन 2026 में एक खरीदार के तौर पर आपको ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। सिर्फ पेट्रोल की बचत देखकर फैसला न लें, बल्कि यह भी सोचें कि 5 साल बाद जब आप इसे बेचने जाएंगे, तो आपको क्या मिलेगा। EV अब 'बचत का गारंटी कार्ड' नहीं, बल्कि एक 'सोचा-समझा निवेश' है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) ❓
- Q: क्या 2026 में EV की बैटरी लाइफ सुधरी है? A: जी हां, नई सॉलिड-स्टेट बैटरी तकनीक आ रही है, लेकिन 2020-2023 में खरीदी गई गाड़ियों में पुरानी तकनीक है, जिनकी लाइफ पर सवाल हैं।
- Q: क्या मुझे पेट्रोल कार ही खरीदनी चाहिए? A: यदि आपका उपयोग कम है (दिन में 20-30 किमी) और आप 5 साल में कार बदलना चाहते हैं, तो पेट्रोल या हाइब्रिड (Hybrid) अभी भी सुरक्षित विकल्प हैं।
पाठकों के लिए सवाल: क्या आप ₹4 लाख एक्स्ट्रा देकर EV खरीदेंगे, यह जानते हुए कि 5 साल बाद उसकी कीमत पेट्रोल कार से कम मिल सकती है? अपनी राय कमेंट में दें।
डिस्क्लेमर: यह लेख 2026 के बाजार परिदृश्य, मौजूदा रुझानों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट है। कार खरीदने का अंतिम निर्णय व्यक्तिगत जरूरतों और वित्तीय स्थिति पर आधारित होना चाहिए। #timelessindianews
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