Trump on Credit Card Interest Cap: राष्ट्रपति ट्रंप ने क्रेडिट कार्ड ब्याज दर को 10% पर सीमित करने की मांग की; बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप; चुनावी वादे की वापसी या राजनीतिक दांव? पढ़ें पूरी खबर


वाशिंगटन डीसी/बिजनेस डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने उस विवादास्पद और महत्वाकांक्षी चुनावी वादे को दोहराया है, जिसने क्रेडिट कार्ड उपभोक्ताओं की उम्मीदें जगा दी हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले ब्याज की दर (Interest Rate) को अधिकतम 10 प्रतिशत पर सीमित करने (Cap) का आह्वान किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी जनता कर्ज और महंगाई के दबाव से जूझ रही है।

चुनावी वादे का पुनरुद्धार (Reviving a Campaign Promise): राष्ट्रपति बनने के बाद से इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखने वाले ट्रंप ने अचानक इस प्रस्ताव को पुनर्जीवित किया है। गौरतलब है कि अपने अभियान के दौरान उन्होंने वादा किया था कि वे अमेरिकी नागरिकों को क्रेडिट कार्ड कंपनियों की मनमानी ब्याज दरों से बचाएंगे, जो वर्तमान में औसत 20 से 25 प्रतिशत तक पहुँच चुकी हैं।

फीस सीमा और नए नियमों का विरोधाभास: ट्रंप के इस आह्वान ने कई विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है क्योंकि हाल ही में उनके प्रशासन ने क्रेडिट कार्ड की 'लेट फीस' पर लगाई गई कुछ सीमाओं को खत्म कर दिया था। आलोचकों का तर्क है कि एक तरफ फीस की सीमाओं को हटाना और दूसरी तरफ ब्याज दर को 10% पर कैप करने की बात करना विरोधाभासी है।

बैंकिंग सेक्टर और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: बैंकिंग उद्योग के विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि:

  1. क्रेडिट की कमी: यदि ब्याज दर 10% पर सीमित कर दी जाती है, तो बैंक उन लोगों को क्रेडिट कार्ड जारी करना बंद कर सकते हैं जिनका 'क्रेडिट स्कोर' कम है (High-risk borrowers)।
  2. लाभप्रदता पर असर: बड़े बैंकों की आय का एक बड़ा हिस्सा क्रेडिट कार्ड ब्याज से आता है। इस सीमा से वित्तीय बाजार में अस्थिरता आ सकती है।
  3. आम जनता को लाभ: यदि यह कानून बन जाता है, तो मध्यम वर्गीय अमेरिकियों को हजारों डॉलर के ब्याज बोझ से राहत मिल सकती है।
निष्कर्ष: राष्ट्रपति ट्रंप का यह कदम उनके 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे के तहत आम लोगों को आर्थिक राहत देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही कई लोग मुक्त बाजार (Free Market) में सरकार के इस तरह के हस्तक्षेप का विरोध कर सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह केवल एक राजनीतिक बयान है या वास्तव में इसके लिए कोई ठोस कानून लाया जाएगा।

⚡️ डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह रिपोर्ट न्यूयॉर्क टाइम्स और आधिकारिक व्हाइट हाउस बयानों पर आधारित है। ब्याज दर में कोई भी बदलाव विधायी प्रक्रिया और कांग्रेस की मंजूरी के अधीन है। #timelessindianews

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