क्या है पूरा मामला (The Incident)? यह घटना तब हुई जब एक निवेशक अपने ट्रेडिंग अकाउंट में लॉग-इन था और ब्रोकर के सिस्टम में एक 'ग्लिच' (Glitch) आया। इस खराबी की वजह से ट्रेडर को उसकी वास्तविक लिमिट से कहीं ज्यादा, यानी 40 करोड़ रुपये का मार्जिन (Margin Money) मिल गया। ट्रेडर ने बिना वक्त गंवाए इस मार्जिन का उपयोग निफ्टी और बैंक निफ्टी के ऑप्शंस में ट्रेड करने के लिए किया। महज 20 मिनट के भीतर उसने अपनी पोजीशन काटी और 1.75 करोड़ रुपये का प्रॉफिट बुक कर लिया।
कानूनी लड़ाई और बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख: जब ब्रोकिंग फर्म को अपनी गलती का अहसास हुआ, तो उन्होंने ट्रेडर के प्रॉफिट को 'अवैध' बताते हुए उसे रोकने की कोशिश की और मामला कोर्ट पहुँचा। ब्रोकर का तर्क था कि यह पैसा सिस्टम की गलती से बना है, इसलिए इस पर ट्रेडर का हक नहीं है।
- हालांकि, Bombay High Court ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि:
ट्रेडर ने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है और न ही सिस्टम को 'हैक' किया है।
मार्जिन उपलब्ध कराना ब्रोकर की जिम्मेदारी है। यदि सिस्टम ने मार्जिन दिया और ट्रेडर ने उस पर रिस्क लेकर ट्रेड किया, तो मुनाफा उसी का होगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर उस ट्रेड में 1.75 करोड़ का नुकसान होता, तो ब्रोकर उसे ट्रेडर से ही वसूलता, इसलिए मुनाफे पर भी ट्रेडर का ही अधिकार है।
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