SC Verdict on Delhi Riots: उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज; 5 अन्य आरोपियों को मिली राहत; जानें कोर्ट ने क्या कहा?


नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने सोमवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी 'बड़ी साजिश' (FIR 59/2020) के मामले में अपना फैसला सुनाया। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद (Umar Khalid) और कार्यकर्ता शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की नियमित जमानत याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया (Prima Facie) आरोप गंभीर हैं।


किसे मिली जमानत और किसे नहीं? कोर्ट ने इस मामले में आरोपी सात लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने आरोपियों के बीच भूमिका (Role) के आधार पर अंतर स्पष्ट किया:

  • जमानत खारिज: उमर खालिद और शरजील इमाम।
  • जमानत मंजूर (Bail Granted): गुलफिशा फातिमा (Gulfisha Fatima), मीरान हैदर (Meeran Haider), शिफा-उर-रहमान (Shifa Ur Rehman), मोहम्मद सलीम खान (Mohd. Saleem Khan) और शादाब अहमद (Shadab Ahmed)।

कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां (Key Highlights):

  1. मुख्य भूमिका (Central Role): सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) के दस्तावेजों से पता चलता है कि खालिद और इमाम की भूमिका केवल स्थानीय विरोध प्रदर्शनों तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे साजिश के 'केंद्र' में थे। उनकी भूमिका रणनीतिक दिशा (Strategic Direction) और भीड़ जुटाने (Mobilisation) में महत्वपूर्ण थी।
  2. UAPA की धारा 43D(5): कोर्ट ने माना कि इनके खिलाफ Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) के तहत मामला बनता है, जिसके कारण जमानत पर कानूनी रोक (Statutory Embargo) लागू होती है।
  3. देरी को 'ट्रम्प कार्ड' नहीं माना: जस्टिस कुमार ने स्पष्ट किया कि UAPA जैसे गंभीर मामलों में केवल मुकदमे (Trial) में देरी को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता, खासकर जब आरोपी की भूमिका गंभीर हो।
  4. राहत की उम्मीद: हालांकि कोर्ट ने जमानत खारिज की, लेकिन उन्हें एक साल बाद या 'प्रोटेक्टेड विटनेस' (सुरक्षित गवाहों) की गवाही के बाद दोबारा जमानत याचिका दायर करने की छूट दी है।
  5. आरोपियों के लिए राहत और शर्तें: अदालत ने अन्य 5 आरोपियों को 12 कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी है। कोर्ट का मानना था कि इनकी भूमिका अन्य दो की तुलना में कम गंभीर (Subsidiary) थी। यदि इन शर्तों का उल्लंघन होता है, तो निचली अदालत को जमानत रद्द करने का अधिकार होगा।

निष्कर्ष: यह फैसला कानूनी रूप से यह स्पष्ट करता है कि UAPA के तहत जमानत मिलना कितना कठिन है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिन्हें जांच एजेंसियां 'मास्टरमाइंड' मानती हैं। उमर खालिद और शरजील इमाम के लिए जेल से बाहर आने का रास्ता अभी और लंबा हो गया है।


⚡️ डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। अंतिम कानूनी स्थिति कोर्ट के लिखित आदेश द्वारा ही मान्य होगी। #timelessindianews

सोर्स लिंक: Live Law / The Hindu
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