नई दिल्ली: इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और ऑडिटिंग फर्मों को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। ICAI ने सरकारी बैंकों (Public Sector Banks) की शाखाओं का ऑडिट करने वाले ऑडिटर्स के लिए 'Peer Review' सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को एक साल के लिए टाल (Defer) दिया है।
क्या है 'Peer Review' और क्यों बढ़ा समय? पीयर रिव्यू एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक प्रोफेशनल द्वारा किए गए काम की समीक्षा दूसरा प्रोफेशनल करता है, ताकि ऑडिट की गुणवत्ता (Quality) सुनिश्चित की जा सके। पहले यह नियम 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 1 अप्रैल 2026 कर दिया गया है।
टालने के मुख्य कारण (Key Reasons for Deferment):
- व्यावहारिक कठिनाइयाँ: कई छोटी और मध्यम स्तर की ऑडिट फर्मों के लिए कम समय में पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट हासिल करना मुश्किल हो रहा था।
- बैंकों का दबाव: बैंक ऑडिट का सीजन (Audit Season) नजदीक है, ऐसे में ऑडिटर्स की कमी न हो, इसलिए यह फैसला लिया गया।
- पर्याप्त समय देना: ICAI चाहता है कि ऑडिट फर्मों को अपनी कार्यप्रणाली सुधारने और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय मिले।
इसका क्या होगा असर (Impact)?
इस फैसले से उन हजारों CA फर्मों को लाभ होगा जो छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में सरकारी बैंक की शाखाओं का वैधानिक ऑडिट (Statutory Audit) करती हैं। अब वे बिना किसी रुकावट के आगामी बैंक ऑडिट सीजन में हिस्सा ले सकेंगी।
पूरी खबर का निष्कर्ष यह है कि ICAI ने ऑडिटिंग की गुणवत्ता और जमीनी हकीकत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। यह उन फर्मों के लिए 'ब्रीदिंग स्पेस' (Breathing Space) है जो अनुपालन (Compliance) के लिए संघर्ष कर रही थीं।
⚡️ डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह रिपोर्ट ICAI की आधिकारिक घोषणाओं और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। विस्तृत तकनीकी जानकारी के लिए ICAI की आधिकारिक वेबसाइट और नोटिफिकेशन देखें। #timelessindianews
Source: Economic Times
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