नई दिल्ली/आध्यात्मिक डेस्क: आज पूरा देश आस्था और उल्लास के संगम का पर्व मना रहा है। उत्तर भारत में जहाँ मकर संक्रांति की रौनक है, वहीं दक्षिण भारत में पोंगल का त्योहार पूरी भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। 14 जनवरी 2026 का यह दिन ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मकर संक्रांति का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व (Significance) जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे 'मकर संक्रांति' कहा जाता है।
- उत्तरायण की शुरुआत: आज से सूर्य 'उत्तरायण' हो जाते हैं, जिसका अर्थ है कि दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं।
- शुभ कार्यों का आरंभ: खरमास की समाप्ति के साथ ही आज से विवाह और गृह प्रवेश जैसे शुभ मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है।
- दान और स्नान: आज के दिन गंगा स्नान और खिचड़ी, तिल, गुड़ व कंबल के दान का विशेष महत्व है।
पोंगल 2026: दक्षिण भारत का महाउत्सव तमिलनाडु और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों में पोंगल का त्योहार चार दिनों तक मनाया जाता है।
फसल उत्सव: यह मुख्य रूप से एक कृषि उत्सव है, जिसमें किसान अपनी अच्छी फसल के लिए भगवान सूर्य और इंद्र देव का आभार प्रकट करते हैं।
परंपरा: मिट्टी के बर्तन में नए चावल, दूध और गुड़ से 'पोंगल' (एक विशेष पकवान) बनाया जाता है, जिसके उबलने को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
भारत के विभिन्न कोनों में अलग-अलग नाम मकर संक्रांति को भारत के अलग-अलग राज्यों में विभिन्न नामों से जाना जाता है:
पंजाब और हरियाणा: यहाँ इसे लोहड़ी (बीती रात) और माघी के रूप में मनाया जाता है।
असम: यहाँ इसे 'भोगाली बिहू' कहा जाता है।
गुजरात: यहाँ इसे 'उत्तरायण' के रूप में पतंगबाजी के साथ मनाया जाता है।
निष्कर्ष:
मकर संक्रांति और पोंगल का यह त्योहार हमें प्रकृति के करीब लाता है और हमें कृतज्ञता का पाठ पढ़ाता है। #timelessindianews की ओर से आप सभी को इन त्योहारों की हार्दिक शुभकामनाएँ।
⚡️ डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह लेख धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। त्योहारों की तिथियां और रीति-रिवाज स्थानीय पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। #timelessindianews
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