नई दिल्ली: भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिसंबर की शुरुआत में हुए भारी परिचालन संकट (Operational Meltdown), जिसके कारण 5,000 से अधिक उड़ानें रद्द हुई थीं, उसकी जांच पूरी हो गई है। DGCA द्वारा गठित चार सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने शुक्रवार (26 दिसंबर) शाम को अपनी 'गोपनीय रिपोर्ट' नागरिक उड्डयन मंत्रालय को सौंप दी है।
जांच रिपोर्ट की मुख्य बातें और विफलताएं:
- शेड्यूलिंग की विफलता: जांच में पाया गया है कि फ्लाइट कैंसिलेशन का मुख्य कारण पायलटों की कमी नहीं, बल्कि पायलटों के ड्यूटी टाइम (FDTL) और उनके रोस्टर को सही ढंग से मैनेज न कर पाना था। आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो के पास मानक से अधिक (891 अतिरिक्त) पायलट थे, फिर भी शेड्यूलिंग फेल रही।
- आंतरिक विफलता: रिपोर्ट में एयरलाइन के ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर की विफलता और पायलटों के साथ मैनेजमेंट के बिगड़ते तालमेल को संकट की बड़ी वजह बताया गया है।
- रिकॉर्ड जुर्माना: सूत्रों के अनुसार, सरकार इंडिगो पर अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगा सकती है। इसके साथ ही एयरलाइन के सीईओ और सीओओ को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है।
- अंतरराष्ट्रीय बनाम घरेलू: रिपोर्ट इस बात पर भी रोशनी डालेगी कि आखिर क्यों इंडिगो का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सामान्य रहा, जबकि घरेलू नेटवर्क पूरी तरह चरमरा गया (घरेलू उड़ानों में 25% तक की कटौती देखी गई थी।
- सुधार के निर्देश: DGCA ने पहले ही इंडिगो को अपना विंटर शेड्यूल 10% तक कम करने का आदेश दिया है ताकि परिचालन स्थिरता बनी रहे।
- पूरी खबर का निष्कर्ष यह है कि इंडिगो का यह संकट न केवल एयरलाइन की छवि पर दाग है, बल्कि यात्रियों के अधिकारों के उल्लंघन का भी बड़ा मामला है। अब सबकी नजरें मंत्रालय द्वारा की जाने वाली 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) पर टिकी हैं, जो अगले 10 दिनों में आने की उम्मीद है।
⚡️ डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह जानकारी आधिकारिक जांच रिपोर्ट और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। अंतिम कार्रवाई और निष्कर्षों के लिए सरकार के आधिकारिक बयान की प्रतीक्षा करें। #TimelessIndianews
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